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न्यायालय के स्टे द्वारा भीलवाड़ा में रूकवाया गया बाल विवाह

जयपुर । भीलवाड़ा जिले के मंगरोप निवासी नायक जाति के परिवार द्वारा अपनी 13 वर्षीय नाबालिग पुत्री का बाल विवाह रचाये जाने की सूचना पुख्ता पाये जाने पर न्यायालय निषेधाज्ञा एवं स्टे जारी कर परिजनों को बाल विवाह नहीं करवाने हेतु पाबन्द किया गया साथ ही यह भी उद्घोषणा की गई कि यदि कोई बाल विवाह रचाया जाता है तो वह कानूनन शून्य एवं अवैध होगा।
जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, भीलवाड़ा के पूर्णकालिक सचिव श्री मोहित शर्मा ने बताया कि प्राधिकरण द्वारा बाल विवाह रोकथाम के तहत चलाये जा रहे अभियान में प्राप्त हुई सूचना पर पुलिस थाना मंगरोप के माध्यम से बाल विवाह करने वाले परिजनों को पाबन्द किया गया। बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम 2006 व नियम 2007 के विधिक प्रावधानों के तहत मंगरोप थानाधिकारी द्वारा न्यायालय न्यायिक मजिस्ट्रेट क्रम संख्या 1 भीलवाड़ा में धारा 13-बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम के तहत परिवाद प्रस्तुत कर शिकायत की गई कि पाबन्दी के बावजूद भी बाल विवाह होने की संभावना है।
इस परिवाद पर संज्ञान लेते हुए न्यायिक मजिस्ट्रेट श्रीमती श्वेता दाधीच ने संबंधित पक्षकारों को न्यायालय के नोटिस द्वारा तलब किया एवं थानाधिकारी व पक्षकारों को सुनने के पश्चात  न्यायालय की निषेधाज्ञा एवं स्टे जारी कर परिजनों को बाल विवाह नहीं करवाने हेतु पाबन्द किया गया।
जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव डॉ. मोहित शर्मा ने बताया कि अमूमन बाल विवाह प्रतिषेध अधिकारियों द्वारा पक्षकारों को पाबन्द करने के पश्चात भी गुपचुप रीति से बाल विवाह करवा दिया जाता है। परन्तु ऎसे प्रकरणों में यदि न्यायालय की निषेधाज्ञा प्राप्त कर ली जावे तो बाल विवाह करवाने वालों को कठोर सजा दी जाती है एवं निषेधाज्ञा के विपरीत कराया गया बाल विवाह विधि अनुरूप स्वतः शून्य व प्रभावहीन रहता है।

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