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कोरोना महामारी और सकारात्मक सोच के विषय के साथ मालवा प्रांत महिला प्रकल्प की ऑनलाईन वार्ता संपन्न

उज्जैन। भारतीय शिक्षण मंडल मालवा प्रांत महिला प्रकल्प उज्जैन (मध्यप्रदेश) की Zoom एप पर मंडल वार्ता सम्पन्न हुई। वार्ता का विषय था -कोरोना महामारी और सकारात्मक सोच।

सर्वप्रथम ध्यान, ध्येय वाक्य से सामूहिक प्रार्थना की गई। श्रीमती रेखा भार्गव, श्रीमती सावित्री महंत, श्रीमती रेखा मेहता, श्रीमती मनीषा व्यास, डॉ.श्रृद्धा व्यास, डॉ. प्रेरणा मनाना, श्रीमती माया बदेका, श्रीमती मधु गुप्ता ने अपने-अपने विचार प्रस्तुत किये।

रेखा भार्गव ने सकारात्मक सोच का उदाहरण राजा राम के वन गमन को लेकर दिया। श्रीराम ने सहज सकारात्मक रुप में वन गमन स्वीकार किया इसी तरह हम सकारात्मक सोच रख कोरोना के विरुद्ध लड़ाई लड़े। उन्होंने कोरोना के खिलाफ जंग लड़ रहे सभी योद्धाओं का धन्यवाद दिया। श्रीराम जी ने वनगमन के समय माता कौशल्या से कहा की-’पिता देही मोहे कानन राजु। उसमें भी वह प्रसन्न रहें। इस तरह हमारे धर्म ग्रंथों से हमें सकारात्मक सोच मिलती है।

कम सामान और कम खर्च में गृहिणी इस महामारी के समय घर को कैसे चला सकती है और चला रही है उसका बहुत सुंदर उदाहरण श्रीमती रेखा मेहता ने दिया। उन्होंने बताया कि आज लाकडाउन के समय हर गृहिणी सीमित साधन मे भी परिवार अच्छी तरह चला रही है, यह सकारात्मक सोच है।

श्रीमती मनीषा व्यास ने संगीत से सोच सकारात्मक रखने की सलाह दी और कछुए का उदाहरण दिया कि कैसे कछुआ अपनी खोल में छुपा रहता है, हम वैसे ही अपने घर में रहे और सुरक्षित रहे। उन्होंने बताया की संगीत निराशा को कम कर देता है।

डॉ.श्रद्धा व्यास ने कहा आत्म बल और आत्म संयम ही इस कठिन दौर में दो मुख्य स्तंभ हैं, जो कि हम अपने इष्ट की आराधना से पा सकते हैं। नियमित प्रार्थना सिद्धियों को जन्म देती है। हम नियमित ईश्वर की आराधना करे। आध्यात्म से हमें बड़ी शक्ति प्राप्त होती है।

माधुरी सौलंकी ने योग और प्राणायाम से सकारात्मक सोच और कोरोना से लड़ने की बात बताई। उन्होंने बहुत अच्छी तरह समझाया की हम योग से कैसे सकारात्मक ऊर्जा को बढा सकते हैं। प्राणायाम हमारा प्राचीन समय से चला आ रहा है। ऋषि मुनि और संतो की देन है।

श्रीमती सावित्री ने बताया कि घर में ईश्वर की आराधना और प्रार्थना से सकारात्मक सोच कोरोना से लड़ने की शक्ति देती है। हम नित दिन प्रार्थना और ध्यान करते रहे। वैश्विक महामारी कोविड 19 के दौर में सकारात्मक रहे ।

इस विषय को लेकर वर्तमान समय में सम्पूर्ण विश्व चिन्तित है कि इस महामारी से देश व विश्व को कैसे मुक्त करें। जब तक कि इसका कोई वैक्सीन तैयार नहीं होता है तब तक हमें इसके लिए हर समय सकारात्मक सोच रखना होगी। नकारात्मक कोई भी बात या सोच को हमारे उपर हावी नहीं होने देना है।

माया बदेका ने कहा कि कोरोना महामारी से विश्व बंधुत्व की भावना विकसित हुई है। दुनिया अपने में ही सिमट रही थी अब लोग जग कल्याण की प्रार्थना करने लगे।

श्रीमती मधु गुप्ता ने कहा-
बड़े दौर गुज़रे हैं ज़िंदगी में,
यह दौर भी गुज़र जायेगा।
थाम लो पैरों को घर में,
कोरोना भी थम जायेगा।।

इस महा संकट के समय निर्भय व सकारात्मक रहने पर ही हम इस जंग को जीत सकते है, इसके लिये अपनी प्रतिदिन की दिनचर्या नियमित कर ईश्वर की आराधना करें व धैर्य रखें। परिवार के साथ आनंद पूर्वक समय बिताये। हमारे पास समय ही समय है इस समय मे हम अपने सभी शौक़ आराम से पूरे कर सकते है।

अंत में प्रांतीय महिला प्रमुख मालवा प्रान्त डॉ. प्रेरणा मनाना ने समग्र रूप से कहा कि माना यह दौर अघोषित अनपेक्षित महासंकट का है, आए दिन समाज से किसी अपने को खो देना बहुत ही दुखदाई है परंतु यह दौर कई सकारात्मक बिंदुओं की ओर हमारा ध्यान आकर्षित कराता है। एक तो हमारी सनातन संस्कृति पर हम सभी को गर्व होने लगा क्योंकि इसे आज विश्व ने माना है। स्वच्छता, शुद्ध आहार, परिवार व्यवस्था, सूतक, एकांतवास, ध्यान, प्रार्थना अभिवादन हेतु नमस्ते, दफनाने के बजाय दाह संस्कार, रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए आयुर्वेद और घरेलू नुस्खे आज सभी ने इन सभी को निर्विवाद रूप से मान लिया है।

दूसरा, इस दौर ने हमें हर तरह से अधिक सजग, समझदार और सावधान होने हेतु प्रेरित किया है। पर्यावरण, नदियां, हवा अधिक शुद्ध हुए हैं और हमें भविष्य में किस तरह अपना आचार विचार व्यवहार रखना है,,इसका सबक भी मिला है। सभी बहनों का आभार व्यक्त किया और कल्याण मंत्र के साथ शीघ्र ही अगली बैठक की घोषणा से वार्ता समाप्त हुई। भारतीय शिक्षण मंडल मालवा प्रान्त,, महिला प्रकल्प उज्जैन की यह अनूठी पहल बहुत सराहनीय रही।

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