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एलपीजी पर सब्सिडी समाप्त करने की सरकार की योजना का विरोध

नई दिल्ली । हर महीने घरेलू गैस के दाम में 4 रूपये की वृद्धि कर इस पर दी जाने वाली सब्सिडी को धीरे धीरे समाप्त करने के सरकार के फैसले पर विपक्षी दलों के सदस्यों ने आज लोकसभा में जबर्दस्त विरोध दर्ज कराया और सरकार से इस फैसले को वापस लिये जाने की मांग की। कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस, राकांपा और वामपंथी दलों ने इस विषय पर सरकार से जवाब भी देने की मांग की और सरकार के कोई जवाब नहीं देने पर सदन से वाकआउट किया।

शून्यकाल में इस विषय को उठाते हुए कांग्रेस के केसी वेणुगोपाल ने कहा कि सरकार के सोमवार को किये गये ऐलान से आम आदमी बुरी तरह प्रभावित होने वाला है। सरकार ने साफ कर दिया है कि मार्च 2018 से वह एलपीजी सिलेंडरों पर दी जाने वाली सब्सिडी को समाप्त करने जा रही है। इससे आम जनता और खासतौर पर महिलाएं बुरी तरह प्रभावित होंगी। वेणुगोपाल ने कहा कि जब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल के दामों में इतनी गिरावट आ रही है तो एलपीजी सिलेंडर पर सब्सिडी समाप्त कर आम आदमी पर बोझ डालने के पीछे सरकार के पास क्या स्पष्टीकरण है? उन्होंने कहा कि सरकार को इस फैसले को तत्काल वापस लेना चाहिए।
तृणमूल कांग्रेस के सुदीप बंदोपाध्याय ने इसी विषय को उठाते हुए कहा कि एलपीजी सिलेंडरों के दामों पर जीएसटी का भी असर पड़ा है। धीरे धीरे पूरी सब्सिडी समाप्त करने से आम जनता पर बुरा असर पड़ेगा। यह जनविरोधी कदम है और इसे तत्काल वापस लिया जाना चाहिए। माकपा की पीके श्रीमती टीचर ने कहा कि सरकार के फैसले के बाद एलपीजी सिलेंडर के दाम 600 रुपये से ज्यादा हो जाएंगे। गरीब आदमी इस बोझ को कैसे सहन करेगा? उन्होंने लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन से अनुरोध किया कि सरकार को इस फैसले को वापस लेने का निर्देश दिया जाए।
आरएसपी के एनके प्रेमचंद्रन ने इस मामले में सरकार पर पारदर्शिता नहीं रखने का आरोप लगाते हुए कहा कि हर महीने बिना सब्सिडी वाले एलपीजी सिलेंडर पर दो रुपये की बढ़ोतरी सरकार की सब्सिडी समाप्त करने की योजना का हिस्सा था और सरकार ने यह बात अब तक सार्वजनिक नहीं की। उन्होंने कहा कि अब सरकार सभी लोगों को एलपीजी पर सब्सिडी छोड़ने के लिए बाध्य कर रही है। कांग्रेस और वामपंथी दलों ने इस विषय पर सरकार से सदन में तत्काल कोई बयान देने की मांग की।
इस पर लोकसभा अध्यक्ष ने कहा कि उन्होंने इस विषय पर शून्यकाल में विभिन्न दलों को बोलने की अनुमति दी है। लेकिन शून्यकाल में वह सरकार के किसी मंत्री को इस संबंध में कोई जवाब देने के लिए बाध्य नहीं कर सकतीं। हालांकि सरकार से बयान की मांग पर अड़े कांग्रेस, वाम दलों के साथ राकांपा और तृणमूल कांग्रेस के सदस्यों ने इस विषय पर सदन से वाकआउट किया।
गौरतलब है कि सोमवार को लोकसभा में एक प्रश्न के लिखित जवाब में धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि हर महीने घरेलू गैस के दाम में होने वाली वृद्धि को दो रुपये से दोगुना करके चार रुपये कर दिया गया है ताकि सब्सिडी को जीरो पर लाया जा सके। प्रधान ने यह जानकारी दी कि सरकार ने यह आदेश 30 मई 2017 को ही पास कर दिया था। इसमें तेल विपणन कंपनियों को एक जून 2017 से हर महीने प्रति सिलेंडर चार रुपये बढ़ाने को कहा है। यह आदेश मार्च 2018 तक या सिलेंडर पर दी जा रही सब्सिडी खत्‍म होने तक जारी रहेगा।
उधर, राज्यसभा में भी इस मुद्दे को लेकर हंगामा हुआ। घरेलू रसोई गैस पर सब्सिडी में कटौती और राज्यसभा चुनाव में नोटा का विकल्प दिए जाने जैसे मुद्दों को लेकर कांग्रेस नीत विपक्ष ने खासा हंगामा किया जिससे उच्च सदन की कार्यवाही बार बार बाधित हुयी और बैठक तीन बार के स्थगन के बाद दोपहर दो बजे तक के लिए स्थगित कर दी गयी। शून्यकाल में जहां घरेलू रसोई गैस यानी एलपीजी पर सब्सिडी में कटौती का मुद्दा हावी रहा वहीं राज्यसभा चुनाव में नोटा का विकल्प का मुद्दा प्रश्नकाल में छाया रहा। हंगामे के कारण सदन में प्रश्नकाल और शून्यकाल दोनों नहीं हो सके।
शून्यकाल में तृणमूल कांग्रेस के डेरेक ओ ब्रायन ने एलपीजी सब्सिडी का मुद्दा उठाया और कहा कि सरकार ने हर महीने प्रति सिलेंडर चार रुपये सब्सिडी कम करने की बात की है। इसका मकसद अगले साल तक सब्सिडी को पूरी तरह से खत्म करना है। उन्होंने सरकार पर उसके वादों को पूरा नहीं करने का आरोप लगाते हुए कहा कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में काफी कमी आयी है लेकिन यहां कीमतों में इजाफा किया जा रहा है। माकपा नेता सीताराम येचुरी सहित कई अन्य सदस्यों ने भी यह मुद्दा उठाया।

 

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