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मंदसौरः कोरोना से जंग जीती लेकिन इंसानियत से जंग हार गई, इंदौर में मौत

मंदसौर। आज की परिस्थिति में जब किसी को भी मोबाईल लगाओ तो घंटी बजने से पहले एक संदेश आता है कि “बीमारी से लड़े, बीमार से नहीं, उनकी देखभाल करें” लेकिन मंदसौर जिले की मल्हारगढ़ तहसील के ग्राम बांसखेड़ी के लोगों ने इस संदेश को पूरी तरह से नकार दिया।

आज बांसखेड़ी की महिला जो कोरोना से तो जंग जीत गई थी लेकिन इंसानियत से जंग हार गई ओर उसकी इंदौर में मौत हो गई।

कोरोना से जीती थी जंग

बांसखेड़ी की महिला जो गर्भवती थी और उसकी रिपोर्ट पॉजेटिव आई थी। गर्भवती होने की स्थिति में उसे इंदौर रेफर किया गया था। इंदौर में उसने दो जुड़वा बच्चों को जन्म दिया जो स्वस्थ थे। कुछ दिनों बाद महिला की दोनों रिपोर्ट नेगेटिव आई और उसे एम.व्हाय हॉस्पिटल इंदौर से डिस्चार्ज कर दिया गया। महिला ने कोरोना से जंग जीत ली थी।

बांसखेड़ी के ग्रामीणों ने गांव में घुसने नहीं दिया

अभी तक तो यही देखने में आ रहा था कि कोरोना से जंग जीतने वाले वापस अपने शहर, गांव, गली, मोहल्ले में पहुंचते है तो उनका ताली-थाली बजाकर और पुष्प वर्षा कर स्वागत सम्मान किया जाता है लेकिन महिला जब अपने जुड़वा बच्चों और पति के साथ 28 मई की रात्रि 1 बजे बांसखेड़ी पहुंची तो बांसखेड़ी के ग्रामीणों ने उसे गांव में घुसने नहीं दिया।

महिला को पहले क्वारेंटाईन सेंटर और फिर इंदौर पहुंचाया

जब महिला को ग्रामीणों ने गांव में घुसने नहीं दिया तब महिला के पति ने इसकी सूचना बीएमओ दिलीप शर्मा को दी। बीएमओ ने महिला को पिपलियामंडी के क्वारेंटाईन सेंटर भेज दिया है। जाहिर से बात है क्वारेंटाईन सेंटर संक्रमितों को भेजा जाता है स्वस्थ को नहीं..! लेकिन महिला की जंग इस बार कोरोना से नहीं इंसानियत से थी। रविवार को महिला को सिद्धि विनायक हॉस्पिटल भेजा गया और वहां से इंदौर रेफर कर दिया गया।

मौत की हुई पुष्टि

आधिकारिक जानकारी के अनुसार इस बात की पुष्टि हो चुकी है कि तबीयत बिगड़ने के कारण बांसखेड़ी की महिला की इंदौर में मौत हुई है। लेकिन महिला कोरोना से जंग जीत चुकी थी इस कारण अभी यह कहा नहीं जा सकता कि महिला की मौत कोरोना से हुई है। महिला की सेम्पल रिपोर्ट अभी आई नहीं है।

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